Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
यथा कल्पद्रुमलताः सच्चिन्तामणयो यथा ।
फलन्ति शरदश्चैतास्तथैवाभ्यासभूमयः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कल्पवृक्ष की लता,
जैसे उत्तम चिन्तामणि अथवा जैसे शरद् ऋतु तत्-तत् अभिमत फल प्रदान करती है, वैसे
ही ये श्रवण आदि के अभ्यास की भूमिका भी अभिमत मोक्षवस्तु प्रदान करती है