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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

दृढाभ्यासाभिधानेन यत्ननाम्ना स्वकर्मणा । निजवेदनजेनैव सिद्धिर्भवति नान्यथा ॥ ४४ ॥

हिन्दी अर्थ

दृढ़ अभ्यास शब्द से कहा जानेवाला प्रयत्ननामक जो अपना कर्म है, उसी से सिद्धि मिलती है, दूसरे से नहीं, यही सत्कर्म अपने विवेक के कारण मानों उत्पन्न होता है