Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
तदा मयोक्ता सा कान्ता क्व भवत्सर्गभूरिति ।
क्व रुद्रार्काग्नितारादि क्व लोकान्तरसप्तकम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी जगत् को न देखकर मैंने उस सुन्दरी बाला से पूछा कि यहाँ
कहाँ पर वे जगत् हैं, जिनका तुमने मुझसे वर्णन किया था, कहाँ रुद्र, सूर्य, अग्नि, तारा आदि हैं
तथा कहाँ यहाँ सात दूसरे-दूसरे लोक हैं