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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

यावत्पश्याम्यहं शुभ्रां शिलां तां न च तज्जगत् । कलधौतमयीमुच्चैरग्निलोकतटीमिव ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

सुवर्णमयी सुमेरुतटी के सदृश वह बहुत बड़ी ऊँची शुभ्र शिला मैंने चारों ओर से खूब देखी, परन्तु उसमें जगत्‌ नहीं दीख पड़ा