Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

उत्तरांशेन्दुशुभ्राभ्रपीठान्निर्गत्य तां शिलाम् । आनीतोस्मि तथोत्तुङ्गां तप्तकाञ्चनकल्पिताम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

उत्तर दिशा के पूर्वभागपर स्थित चन्द्रसदृश अतिधवल आकाश पीठ से नीचे आकर मैं उसके द्वार उस शिला के पास ले जाया गया । वह शिला बड़ी ही ऊँची और रुप-रंग में तपे सोने के सदृश कल्पित थी