Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
तमुल्लङ्घ्य चिरेणात्र भूतसंचारमम्बरे ।
लोकालोकशिरोव्योम प्राप्तोऽस्मि धवलाम्बुदम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ समय बाद इसी
आकाश में उस देशादि प्राणियों के संचरण मार्ग को भी पारकर मैं उसके साथ श्वेत मेघ सदृश
अतिनिर्मल लोकालोक पर्वत के शिखर के आकाशभाग में पहुँच गया