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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

अथाहं दूरमध्वानं शून्यमुल्लङ्घ्य नाभसम् । नभःस्थं भूतसंघातं तया सार्धमवाप्तवान् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

तदन्तर उसके साथ में दूर के शून्यरूप आकाशमार्ग को लाँधकर आकाशमण्डल में स्थित देवता आदि प्राणियों के समीप जा पहुँचा