Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अतस्तच्चिद्धनं स्वच्छं ब्रह्माकाशं शिलाकृति ।
दृष्टं मया तथा तत्र न तु पृथ्व्यादि सत्क्वचित् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यही
कारण है कि भेने स्वरूपबोध के पहले जिसकी आकृति शिलामय देखी थी, उस स्वच्छ चिद्घन
ब्रह्माकाश को मैंने चेतनघन सद्रूप देखा, पृथ्वी आदि के विकार के रूप से कहीं नहीं
देखा