Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
भूतानामादिसर्गे यच्छुद्धं यत्पारमार्थिकम् ।
वपुस्तदेव ह्येतेषां ध्यानलभ्यमवस्थितम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
भूतो की आदि सृष्टि में स्थित जो शुद्ध ओर जो पारमार्थिक ब्रह्मरूप है वही
तत्त्वज्ञानियों के ध्यान से लभ्य इन सभी प्राणियों का शरीर स्थित है