Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
ब्राह्मं वपुर्हि भूतानामात्मीयं यत्पुरातनम् ।
तदेवाद्य मनोराज्यं संकल्प इति कथ्यते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जो ब्रह्म का
आत्मीय पुरातनरूप है वही भूतो का अपना पारमार्थिकरूप है वह मनोराज्य या संकल्प तुल्य
ही है । उसीको इस समय मूढ लोग जगत के नाम से कहते हैं