Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
यदसत्तत्कृतं सत्यं यत्सत्यं तदसत्कतम् ।
अहो नु मोहमाहात्म्यं जीवस्यास्याविचारजम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
अहो, इस जीव के
अविचार से उत्पन्न हुए मोह के माहात्म्य को तो जरा देखिये, उसने जो असत् है उसे सत्य ओर जो
सत्य पदार्थ है उसे असत् बना दिया है