Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

सर्वार्थभावनात्यागे चिन्मात्रैकान्तभावितः । अत्यजं तमहं पूर्वकथार्थकलनामलम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

ओर उस समाधि में सम्पूर्ण बाह्य पदार्थों की कल्पना का त्याग हो जाने पर चिन्मात्र एकरूप होकर मेने उस पूर्व-कथार्थ की आधिभौतिक देहादि की भावना और उसके संस्कारमल का भी बिल्कुल त्याग कर दिया