Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अथ चिद्व्योमतां प्राप्तः परां दृष्टिमहं गतः ।
शरत्समयसंप्राप्तौ व्योम निर्मलतामिव ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर
चिदाकाशरूपता को प्राप्त होकर मैं दिव्य दृष्टि को ऐसे प्राप्त हुआ, जैसे शरत्काल में आकाश
निर्मलता को प्राप्त होता है