Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
ततः सत्यावधानैकघनाभ्यासेन देहके ।
ममाधिभौतिकभ्रान्तिर्नूनमस्तमुपागता ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर सत्य परमात्मा के दृढ़ अभ्यास से देह में मेरी
आधिभौतिकता भ्रान्ति निश्चितरूप से अस्त हो गई