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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

अयं शैल इदं व्योम जगदेतदिदं त्वहम् । इति चिन्मय आत्मान्तः खं चमत्कुरुते स्वयम् ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, यह पर्वत, यह आकाश, यह जगत्‌ और यह मैं-इत्यादि सब कुछ चिन्मय आत्मा ही चिदाकाशरूप से स्वयं अपने स्वरूप में भासता है