Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सुरसिद्धाप्सरःसङ्घाः समाजग्मुः समंततः ।
यथा हंसालयो लोलाः प्रातर्विकसितं सरः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर, देव, सिद्ध ओर अप्सराएँ चारों
तरफ से ऐसे आ धमकी, जैसे प्रातःकाल में खिले हुए कमलो से युक्त सरोवर में चंचल
हंसपंक्तियाँ