Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
ददर्शासौ पुरःप्राप्तं मां च तां च विलासिनीम् ।
उवाचाथ वचो वेधाः प्रणवस्वरसुन्दरम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, उस ब्रह्मा ने सामने उपस्थित हमको ओर विलासिनी उस रमणी
को देखा। देखने के बाद उन्होने यह वचन कहा । उनका वचन ॐकार पूर्वक स्वरोच्चार के कारण
बड़ा ही रम्य लगता था