Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तत्र शैलसरित्स्रोतोलोकालोकान्तरभ्रमाः ।
भान्ति ते परमादर्शे महाव्योमनि बिम्बिताः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
पर्वत,
नदियाँ, झरने तथा लोकलोकान्तर आदि के जितने भ्रम हैं वे सब उसी ब्रह्म में दीख पड़ते हैं । ये
महाकाशरूपी उत्कृष्ट दर्पण में प्रतिबिम्बित हैं