Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
सा प्रविष्टा ततः सर्गं तमनर्गलचेष्टिता ।
अहमप्यविशं तत्र संकल्पात्मा तया सह ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, तदनन्तर अबाध गतिवाली वह
विद्याधरी उस शिला के पेट में स्थित जगत् में प्रविष्ट हो गई, संकल्परूप मैं भी उसके साथ उसके
भीतर प्रविष्ट हो गया