Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
ततो मुहूर्तमात्रेण सर्वभूतगणोदिते ।
शान्ते प्रणतिसंरम्भे तस्योक्तं ब्रह्मणो मया ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर एक मुहूर्तमात्र में देव, गन्धर्व आदि भूतगणो के द्वारा
वाणी से किया गया प्रणाम समारोह जब शान्त हो गया, तब मैंने उन ब्रह्माजी से कहा