Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 34
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हिन्दी अर्थ
हे वसिष्ठजी, उक्त विशुद्धस्वरूप मुझको पूर्वपूर्व के अहंकार के संस्कार से उत्पन्न स्मृति-
जैसी जो अहभ्रान्ति, जगस्स्थिति ओर वासना हुई, उसकी अधिष्ठात्री देवता ही यह शरीररूप
होकर स्थित है