Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 36
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हिन्दी अर्थ
तब यह आपको अपना पति क्यों कहती है इसपर कहते हैं /
चूँकि यही भीतर की समस्त जगत् की वासना है, इसलिए अपनी वासना के आवेशवश से यह
“मैं ब्रह्मा की पत्नी हूँ" इस तरह की भावना को अपने ही मन की इच्छा से प्राप्त हुई है और उसे
प्राप्त कर निरर्थक ही अत्यन्त दुःख को प्राप्त हो गई है