Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 7, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अज्ञानमुत्पत्तिमही नरा विहगकोटयः ।
उपलम्भो बृहत्स्तम्भो दवो निर्वाणनिर्वृतिः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान ही इसकी उत्पत्ति की भूमि है,
अनेक जीव इसके करोड़ों पक्षी हैं, भ्रान्तिज्ञान ही इस वृक्ष का स्तम्भ है यानी सम्पूर्ण शाखाओं के
आधारभूत मध्यभाग है तथा तत्त्वबोध से प्रपंचनिवृत्तिरूपी मोक्ष ही इसे जलाने के लिए दावाग्नि
हे