Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 7, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
सप्ताब्धयोऽग्रसुतयः पातालं मूलकोटरम् ।
युगानि घुणवृन्दानि पर्वाणि गुणपङ्क्तयः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
सातों समुद्र इसके आलबालपरिखा (चारों ओर के थाले) हैँ, पाताल इसका
मूल कोटर है, सत्ययुग आदि चारों युग इसके घुणसमूह (संधि स्थान) हैं तथा प्रत्येक युग के वर्ष,
ऋतु ओर मास आदि इस वृक्ष के पोर (कीड़े) हैं