Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 7, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
उपदेशगिरामर्थमादत्ते हारिहेलया ।
मुकुरे निर्मले द्रव्यमयत्नेनैव बिम्बति ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः मुझे विश्वास है कि यह तुम्हारी बुद्धि मेरी उपदेशवाणी के अर्थ का बिना
किसी प्रयत्न के अवश्य ही आनन्दपूर्वक ग्रहण कर लेगी, क्योकि निर्मल दर्पण में पदार्थों का
प्रतिबिम्ब बिना यत्न के ही पड़ता है