Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 7, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
यदिदं वच्मि तत्सर्वमोमित्यादातुमर्हसि ।
अस्माभिश्चिरमन्विष्टं नात्र कार्या विचारणा ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं जो कुछ यह कहूँगा, उन सबका तुम हाँ” कह
करके ग्रहणकर लेना, तुम ग्रहण करने में ही समर्थ हो । मेने इस विषय में चिरकालतक खूब
अन्वेषण किया है, इसमें कुछ भी तुम विचार मत करो