Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

घटे पटे वटे कुड्ये खेऽनलेऽम्भसि तेजसि । जगन्ति सन्ति सर्वत्र शिलायामिव सर्वदा ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, घट में, पट में, दीवार में, आकाश में, वायु में, जल में, तेज में, सर्वत्र-सभी जगह, शिलोदर के सदृश, अनेक जगत्‌ विद्यमान हैं