Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
परिज्ञाता सती येषामेषा चिन्नभसैकताम् ।
गता ते न विमुह्यन्ति शिष्टास्तु भ्रमभाजनम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
यह माया भ्रान्तिरूप परिज्ञात होकर जिनकी दृष्टि में
चिदाकाशरूप बन जाती है, उनके लिए तो वह सदा के लिए चली ही गई समझनी चाहिए ओर
बाकी जो लोग बच गये, उनको तो भ्रम के ही पात्र समझ लीजिए