Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियाद्रव्यमनोबुद्ध्यादिकं त्विदम् ।
चिच्छिलाङ्गकमेवैकं विद्ध्यनस्तमयोदयम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, ये जो देश, काल, क्रिया,
द्रव्य, मन, बुद्धि आदि हैँ, वे सबके-सब केवल चितिरूपी शिला की प्रतिकृतियाँ हैं, अतः उनका
न उदय है ओर न अस्त ही है, यह आप जानिये