Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अग्निदाहजलापूरयुद्धप्रोच्छिन्नमण्डला ।
अवृष्ट्यवग्रहोन्नष्टकष्टचेष्टितपामरा ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें अग्निदाह, जल के पुर एवं युद्धो से मण्डल के
मण्डल छिन्न-भिन्न हो गये । तथा वह अतिवृष्टि व अनावृष्टि से कष्टपूर्वक जीवनयापन के व्यापारो
से पामर हुए मनुष्यों से भर गई