Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अशङ्कितमहोत्पातपतत्पर्वतपत्तना ।
शिशुश्रोत्रियमुन्यार्यगुणिनाशरुदज्जना ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
अशंकित महान् उत्पातां से उस समय वहाँ पर्वत, नगर अपने-
आप गिरने लगे, बच्चों के, श्रोत्रिय ब्राह्मणों के, मुनियों के, आर्यो के एवं गुणीजना के विनाशसे लोग
रुदन करने लगे