Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अशङ्कितस्थलीमध्यसंजातागाधकूपका ।
वर्णसंकरनारीणामासक्तजनभूमिपा ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जल की दुर्लभता के कारण स्थलियों के बीच में निःशंक वहाँ जहाँ तहोँ अगाध
कूप लोगो ने खन दिये थे । वर्णसंकरो के निमित्त नारियों में वहाँ साधारणजन, एवं राजा आदि सब
गोत्रादि का विचार किये बिना ही विवाह मेँ आसक्त होने लग गये