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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

दस्यूत्सन्नपुरग्रामदेवद्विजसमाश्रया । आपातमधुरारम्भदुःखदोदरभङ्गुरा ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

नगर, गाँव तथा देवता और ब्राह्मणों के मन्दिरों को दस्युओं ने छिन्न-भिन्न कर दिया एवं अन्यायोपार्जित धन से अपना कुटुम्बपोषण करने मेँ आपाततः मधुर ओर परिणाम में (परलोक में) दुःखद उदरवाले अल्पायु पुरुष दिखलाई पड़ने लग गये