Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
आलस्योल्लासविलसत्कार्यवैधुर्यधर्मिणी ।
सर्वापदुपतापान्ता क्रमेणोत्सन्नदिग्गणा ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
आलस्यदोष से सब धार्मिक पुरुषों ने अपना-अपना नियमित सन्ध्यावन्दन आदि
कार्य छोड दिया । परिणाम में सब अनेकविध आपदाओं एवं रोगों से धिर गये तथा क्रम से दिशाओं
के मण्डल के मण्डल छिन्न-भिन्न होने लग गये