Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
दुर्भगाडम्बरारम्भरोदनोरुरवोदरी ।
मुष्टिप्रमाणजनता जनतापानुषङ्गिणी ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
सारी पृथ्वी का पेट अभागी प्रजाओं के बड़े-बड़े समारोह एवं रोने के
शब्द से युक्त बन गया, सारी जनता चोरी करने में प्रवीण बन गई तथा सभी मनुष्यों को प्रतिक्षण
सन्तापो का ही सामना होने लगा