Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
प्रवृत्ता विकृतिं गन्तुमुन्मत्ता इव राविणः ।
वीचिविक्षोभविन्यासैर्वेलाविपिनलावकाः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर उन्मत्तो के सदुश शब्द कर रहे समुद्र विकृतभाव धारण करने
लग गये ओर अपनी बड़ी-बड़ी तरंगों के नाना प्रकार के विक्षोभों से तटस्थ जंगलों का उच्छेद करने
लग गये