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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

यदा विक्षुभितात्मासीत्तदा नियत्तिलङ्घनात् । समुत्सार्यार्यमर्यादामर्णवा विवृतार्णसः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

जब जलधातु का स्वरूप कुपित हो गया, तब उसने भी अपना नियम तोड़ दिया और नियम तोडने के कारण समुद्र अपनी प्राचीन आर्यमर्यादा को तिलांजलि देकर अन्धाधुंध विस्तृत जल से लबालब भर गये