Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
तमेवानुसरन्ती सा तथैव ध्यानगा सती ।
वासनासीदशेषांशा शान्ता चाकाशरूपिणी ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
यह विद्याधरी भी ब्रह्माजी का अनुसरणकर ध्यानमग्न हो गई और फिर
स्मरणहेतु समस्त बीजभूत संस्कारों से रहित होकर शान्तस्वभाव हो आकाशरूपिणी हो गई