Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
श्रूयमाणपतच्छैलतटीकटकटारवाः ।
मत्स्यपुच्छच्छटाच्छिन्नमग्नोन्मग्नद्रुताद्रयः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय उनमें गिर रहे पर्वततटों के कटकट शब्द सुनाई पड़ने लगे। तथा उनमें
बड़े-बड़े मत्स्यो के पुच्छों की छाट से ही छिन्न-भिन्न होकर पर्वत शीघ्र नीचे-ऊपर डूबने-उतराने
लगे