Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
लीलालूनवनव्यूहशीतलासारवारयः ।
प्रज्वलद्वडवावह्निज्वालावलिमिलज्जलाः ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
लीला से काटे गये अरण्यसमूहों में समुद्रों की कहीं तो शीतल जलधाराएँ बहने लगीं और
कहीं जल रही बड़वाग्नि की ज्वालापंक्तियों से मिश्रित होकर अत्यन्त ही गरम बहने लगीं