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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 50

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

पुस्फोटेव पतन्ती द्यौर्दिशां पतिरवारवैः । आवर्तवलनाकाराः केतवः पेतुरम्बरात् ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

आकाशमण्डल से आवर्तौ की गोलाई के सदृश वर्तुलाकार उत्पातजनक धूमकेतु गिरने लगे, उनका वर्णं सुवर्ण, रत्न, मोती एवं सिन्दुर वर्ण के सपं के सदुश था