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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 54

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

परिपातपरा आसन्ब्रह्मलोकगतेश्वराः । कम्पैः कटकटारावपतत्पादपपङ्कयः ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

भू-कम्पनों से कटकट शब्द के साथ वृक्षों के समूह गिरने लगे ओर अनेक तरह के झूलों के सदृश आन्दोलन की गतिर्या पर्वतो को अनुभूत होने लगीं