Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
द्विविधानि महाभूतान्यलं संक्षोभमाययुः ।
चन्द्रार्कानिलशक्राग्नियमाः कोलाहलाकुलाः ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
चन्दर, सूर्य, वायु, इन्द्र, अग्नि
एवं यम-ये सब बड़े कोलाहल से ग्रस्त हो गये, उनका अधिकार प्रभाव ब्रह्मलोक में मिल गया, वे
अपने-अपने स्थान से च्युत होने लग गये