Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
चलज्ज्वालाजटाटोपा विविधोत्पातपङ्कयः ।
पृथ्व्यादीन्यसुरादीनि ब्रह्मोन्मुक्तानि सर्वतः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, मैंने पहले जिन ब्रह्माजी
का वर्णन किया है, उन्होने जब अपना विधारणसंकल्प समेट लिया, तब उपेक्षित असुर आदि एवं
पृथ्वी आदि दोनों तरह के भी महाभूत सब ओर विक्षुब्ध हो उठे