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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

यथास्माकमसंवित्तेरङ्गाली विरसा भवेत् । तथा विरिंचिसंवित्तैर्धरा वैधुर्यमागता ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

आथयस्थ दुष्टान्त को प्रकट करते हैं / जैसे हम लोगों के अंग संवेदना के उपसंहार में नीरस हो जाते हैं, वैसे ही ब्रह्माजी की अंगभूत पृथ्वी संवेदन के उपसंहार मेँ नीरस हो गई