Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 72, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अथ तन्मन आभोगि भाविताहंकृति स्फुरत् ।
संकल्पात्मकमाकाशमास्ते स्तिमितमक्षयम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर विशाल वह मन अहंकार की
भावना कर जब स्फुरित होता है, तब "अहम्" रूप धारण करता है, परन्तु संकल्पात्मक भी निश्चल
ओर अविनाशी चिदाकाश ही है