Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 72, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यदा तत्त्वपरिज्ञानमस्मदादेस्तदाऽऽततम् ।
इदं संसरणं विद्धि शून्यं सत्यमिव स्थितम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
कब शान्त हो जाता हैं, उसे कहते हैं /
जब हम लोगों को तत्त्वज्ञान हो जाता है, तब विस्तृत यह प्रपंच जो शून्यरूप होते हुए
भी सत्य-सा बनकर स्थित है, उपसंहत (शान्त) हो जाता है