Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 72, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
एवमेष स यो ब्रह्मा स एवेदं जगत्स्थितम् ।
विराजो ब्रह्मणो राम देहो यस्तदिदं जगत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
ठीक यही बात रहे, परन्तु इससे क्या मेरे प्रश्न का उत्तर हो गया, इस पर कहते हैं /
भद्र श्रीरामजी, इस रीति से जो यह ब्रह्मा हैं, वही यह स्थित जगत् है । सारांश यह कि विराट्
ब्रह्मा का जो देह है, वही यह जगत् है