Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 72, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
संकल्पाकाशरूपस्य तस्य या भ्रान्तिरुत्थिता ।
तदिदं जगदाभाति तद्ब्रह्माण्डमुदाहृतम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्पाकाशरूपी ब्रह्माजी की जो भ्रान्ति उठी है,
वही यह जगत् भासता है और वही ब्रह्माण्ड कहा जाता है, इसलिए भ्रान्ति से ही ब्रह्माण्ड में
स्थूल-देहता है । विचार से तो उसकी मनोमयता ही है, इसलिए उसके अंगों के उपसंहार से
उपसंहार हो गया, यह पूर्वोक्त बात सिद्ध हो गई