Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 72, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
इदं किंचिन्न किंचिद्वा द्वैताद्वैतविवर्जितम् ।
चिदाकाशं जगद्विद्धि शून्यमच्छं निरामयम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह न द्वैतरहित है, न अद्रैतरहित है ओर न
द्वैताद्वेत से ही रहित है उस चिदाकाश को ही आप जगत् जानिये, जो स्वयं स्वच्छ एवं
विकारशून्य है